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अडिग खाकी:न झुकने वाली हिम्मत,न रुकने वाली ममता

खाकी झुकती नहीं, क्योंकि उसमें साहस की लौ जलती है। ममता रुकती नहीं, क्योंकि दिल में इंसानियत बसती है। पीठ पर उसकी दुनिया का बोझ होता है, तो कंधों पर कर्तव्य का भार। हर चुनौती को वह मुस्कुराकर स्वीकार करता है, हर मुश्किल में आगे बढ़ता है।दिन हो या रात, धूप हो या बारिश, वह अपने फ़र्ज़ से पीछे नहीं हटता। अपने दर्द को छुपाकर, दूसरों की सुरक्षा में जुटा रहता है। परिवार से दूर रहकर भी, पूरे समाज को अपना परिवार मानता है।न डर उसे थकाता है, न मुश्किलें उसे झुकाती हैं। उसकी पहचान सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि उसकी निष्ठा, साहस और समर्पण है। यही वजह है कि वह हर हाल में डटा रहता है, हर हाल में लड़ता है।यही है असली “धुरंधर”, जो खाकी की शान और देश का अभिमान है।



