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Chandauli News-बाबा कालेश्वर नाथ मंदिर में दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु,दर्शन से दूर होता है काल ऐसी है मान्यता


चंदौली -बाबा कालेश्वर नाथ मंदिर में आसपास के जिलों के साथ-साथ बिहार से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आस्था का यह केंद्र वर्षों से भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है। महाशिवरात्रि पर यहां दर्शन के लिए विशेष उत्साह देखने को मिलता है।

जलाभिषेक के लिए प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए। जलाभिषेक के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं। पुलिस बल तैनात रहा और जगह-जगह बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।लंबी कतार में भक्त, दर्शन की प्रतीक्षामंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग गई। हाथों में जल और बेलपत्र लिए श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कई भक्त घंटों लाइन में खड़े रहकर बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा करते दिखे।

दर्शन से दूर होता है काल — ऐसी है मान्यता

स्थानीय मान्यता है कि बाबा कालेश्वर नाथ के दर्शन और जलाभिषेक से अकाल मृत्यु और संकट दूर हो जाते हैं। यही आस्था हर वर्ष हजारों भक्तों को यहां खींच लाती है।

अंग्रेजी हुकूमत का प्रयास और चमत्कार की कथा

कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के समय मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया गया था। किंवदंती के अनुसार अधिकारियों से भरी ट्रेन की एक बोगी जल समाधि में समा गई। इसके बाद एक अंग्रेज अधिकारी की पत्नी ने मंदिर में शिलालेख लगवाकर बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।

सकलडीहा के चतुर्भुजपुर में स्थित है स्वयंभू शिवलिंग

यह प्राचीन मंदिर चतुर्भुजपुर में स्थित है, जो सकलडीहा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां विराजमान बाबा कालेश्वर नाथ की शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, जो भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है।महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर एक बार फिर यह सिद्ध हो गया कि श्रद्धा और विश्वास के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है। “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ भक्तों ने सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

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