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Chandauli News-मनरेगा में बदलाव से मजदूरों के अधिकार खत्म करने की साजिश:अरूण द्विवेदी

चंदौली (यूपी)।जिला कांग्रेस कार्यालय चंद्रा त्रिपाठी भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस जिला अध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों को ग्रामीण मजदूरों के काम के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को रोजगार की कानूनी गारंटी प्राप्त थी और किसी भी ग्राम पंचायत में काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार देना अनिवार्य था, लेकिन प्रस्तावित बदलावों के बाद यह अधिकार समाप्त हो जाएगा।


अरुण द्विवेदी ने आरोप लगाया कि अब मनरेगा सरकार की मर्जी से बांटी जाने वाली योजना बन जाएगी। किस ग्राम पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं, यह निर्णय केंद्र सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में तय न्यूनतम मजदूरी दी जाती थी, जिसमें हर साल बढ़ोतरी होती थी और आवश्यकता पड़ने पर साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि ग्रामीण परिवारों के पास आय का विकल्प बना रहे।उन्होंने कहा कि नए बदलावों के तहत मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी। न तो न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी रहेगी और न ही वार्षिक बढ़ोतरी की। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होने से मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर होगी और वे बिना न्यूनतम मजदूरी के काम स्वीकार करने को मजबूर होंगे।


कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि इन बदलावों से ग्राम पंचायतों की शक्तियां छीनकर ठेकेदारों को सौंपी जा रही हैं। पहले ग्राम पंचायत और ग्राम सभा गांव के विकास कार्यों की योजना बनाती थीं और ठेकेदारों पर प्रतिबंध था, लेकिन अब सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिए लिए जाएंगे। इससे ग्राम पंचायतें केवल केंद्र सरकार के आदेश लागू करने वाली एजेंसियां बनकर रह जाएंगी।उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को कमजोर किया जा रहा है और उन पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पहले मजदूरी का भुगतान केंद्र सरकार करती थी, जिससे राज्य सरकारें बिना कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थीं, लेकिन अब मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को वहन करना होगा, जिसके चलते खर्च बचाने के लिए काम न दिए जाने की आशंका है।
मोदी सरकार के रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए अरुण द्विवेदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मनरेगा मजदूरी में नाममात्र की बढ़ोतरी हुई है और उच्च महंगाई के बावजूद पिछले तीन वर्षों से मनरेगा बजट में कोई वृद्धि नहीं की गई है। इससे साफ है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रही है।उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक इस कानून के खिलाफ विरोध करेगी और 12 जनवरी को पंडित कमलापति त्रिपाठी पार्क में एक दिवसीय उपवास रखा जाएगा।


पत्रकार वार्ता में शहर कांग्रेस अध्यक्ष बृजेश गुप्ता ने कहा कि मनरेगा में बदलाव से बेरोजगारी बढ़ेगी, मजदूरों का शोषण होगा, शहरों की ओर मजबूरी में पलायन बढ़ेगा और पंचायतों की शक्तियां व अधिकार समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग की कि मनरेगा में किए गए बदलाव तत्काल वापस लिए जाएं, काम के संवैधानिक अधिकारों की पूर्ण बहाली की जाए और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन सुनिश्चित की जाए।प्रेस कॉन्फ्रेंस में मधु राय, गंगा प्रसाद, तौफीक खान, शिवेंद्र मिश्रा, राकेश सिंह, मनोज सिंह, पंकज तिवारी, पिंटू विश्वकर्मा, राम आधार यादव, अमर देव राम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन मौजूद रहे।

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