निजी अस्पतालों के पंजीकरण पर उठे सवाल, दूसरे राज्यों के डॉक्टरों की डिग्री के इस्तेमाल का आरोप
चंदौली। जनपद में निजी अस्पतालों के पंजीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ अस्पतालों का पंजीकरण दूसरे राज्यों में कार्यरत डॉक्टरों की डिग्री और प्रमाणपत्र के आधार पर कराया गया है, जबकि संबंधित डॉक्टर अस्पतालों में नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के चिकित्सकों के प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर कागजी प्रक्रिया पूरी की गई और अस्पतालों का पंजीकरण कराया गया। वहीं, पंजीकृत डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में कथित रूप से झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
आरोप है कि ऐसे अस्पतालों में प्रसव और गंभीर मरीजों का उपचार भी अधिकृत चिकित्सकों की गैरमौजूदगी में किया जाता है। इससे मरीजों की जान पर खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। निजी अस्पतालों के पंजीकरण में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच जिले में मातृ मृत्यु दर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि मातृ मृत्यु के पीछे कई चिकित्सकीय और सामाजिक कारण हो सकते हैं, इसलिए प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. परितोष मिश्रा ने कहा कि निजी अस्पतालों से संबंधित शिकायतों की जांच कराई जाएगी। साथ ही मातृ मृत्यु के मामलों के कारणों की भी समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन अस्पतालों में नियमों का पालन हो रहा है और कहां अनियमितताएं सामने आती हैं।
